प्रश्न : 'परिमल' काव्य के रचयिता थे – (अ) कबीर (ब) बाबू गुलाबराय (स) महादेवी वर्मा (द) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

प्रश्न : 'परिमल' काव्य के रचयिता थे –

(अ) कबीर
(ब) बाबू गुलाबराय
(स) महादेवी वर्मा
(द) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'

सही उत्तर: (द) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'


विस्तृत व्याख्या :

'परिमल' हिन्दी काव्य-जगत की एक महत्त्वपूर्ण रचना है, जिसे लिखा है – सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' ने।
यह काव्य-संग्रह न केवल छायावाद युग का प्रतिनिधि ग्रंथ है, बल्कि यह हिन्दी काव्य में नवीनता, विद्रोह, और भाव-सौंदर्य का परिचायक भी है।

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लेखक परिचय: सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' (1896–1961)

  • हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक (अन्य तीन – जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा)।
  • निराला जी का काव्य चिंतन परंपरा और नवता का अद्भुत संगम है।
  • उनकी रचनाओं में मानवता, करुणा, विद्रोह, सौंदर्य और स्वतंत्रता की गहन भावना पाई जाती है।

उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं:

  1. परिमल
  2. अनामिका
  3. गीतिका
  4. कुकुरमुत्ता
  5. अणिमा
  6. तुलसीदास (निबंधात्मक कृति)

'परिमल' काव्य-संग्रह:

‘परिमल’ निराला जी का पहला प्रकाशित काव्य संग्रह है, जो 1930 के दशक में प्रकाशित हुआ।
इस संग्रह में कविता, गीत, छायावादी भावनाएँ, और आत्म-संघर्ष का सुंदर समन्वय है।

इस संग्रह की विशेषताएँ:

  • छायावादी सौंदर्य-बोध – प्रकृति, प्रेम, आत्मा, सौंदर्य की रहस्यमयी अभिव्यक्ति।
  • भाषा की लयात्मकता और सरसता – संस्कृतनिष्ठ एवं तत्सम शब्दों का प्रयोग।
  • भावप्रधानता – गहन भावनाओं को सजीव चित्रों के माध्यम से व्यक्त करना।
  • नवीनता और विद्रोह – निराला के गीतों में रूढ़ियों और अंधविश्वासों के प्रति विद्रोह दिखाई देता है।

उदाहरण कविता (परिमल संग्रह से):

"वर दे वीणावादिनी वर दे"
यह कविता सरस्वती वंदना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें ज्ञान, कला और शक्ति की याचना की गई है।

अब अन्य विकल्पों का विश्लेषण करें:

(अ) कबीर

  • संत-कवि कबीर दास 15वीं शताब्दी के निरगुण भक्ति मार्ग के कवि थे।
  • उन्होंने बीजक, साखी, रमैनी जैसी रचनाएँ कीं।
  • परंतु ‘परिमल’ उनकी कोई रचना नहीं है।

(ब) बाबू गुलाबराय

  • हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार थे।
  • उन्होंने समीक्षा, व्यंग्य और गद्य लेखन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • ‘रस मीमांसा’ और ‘हिन्दी साहित्य का विवेचन’ जैसी रचनाएँ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।
  • वे कवि नहीं थे, इसलिए 'परिमल' उनके द्वारा नहीं लिखा गया।

(स) महादेवी वर्मा

  • हिन्दी की प्रसिद्ध छायावादी कवयित्री थीं।
  • उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं: नीरजा, दीपशिखा, यामा आदि।
  • ‘परिमल’ उनकी रचना नहीं है, बल्कि यह निराला जी का काव्य-संग्रह है।

निष्कर्ष:

‘परिमल’ काव्य-संग्रह सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' की रचना है, जो छायावाद के उत्कर्ष को दर्शाने वाली एक अमूल्य साहित्यिक निधि है।
इसमें कवि की सांस्कृतिक चेतना, सौंदर्य दृष्टि, सामाजिक विद्रोह और आत्मिक संवेदनाएँ प्रकट होती हैं।

इसलिए प्रश्न का सही उत्तर है – (द) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'।

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