प्रश्न: मूल स्वर है -
(अ) आ ई ऊ
(ब) अ इ उ ऋ
(स) ए ऐ ओ
(द) अ अ:
उत्तर - (ब) अ इ उ ऋ
Explanation (स्पष्टीकरण)
मूल स्वर (Vowel) का विस्तृत विवरण:
हिंदी भाषा में स्वर (vowels) के विभिन्न प्रकार होते हैं, जिनमें से मूल स्वर विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। इनका प्रयोग शब्दों के निर्माण में अत्यधिक होता है।
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मूल स्वर वह स्वर होते हैं जिनका अपनी ध्वनि के साथ कोई संयुक्त वर्ण नहीं होता, अर्थात ये स्वर अकेले ही उच्चारित होते हैं। हिंदी में चार प्रकार के मूल स्वर होते हैं।
इन स्वर का चयन करके हम शब्दों को उच्चारित करते हैं। इनके बारे में विस्तार से समझते हैं:
1. अ (अ):
यह सबसे सामान्य और बुनियादी स्वर है, जो किसी भी उच्चारण के दौरान आसानी से पाया जा सकता है। यह स्वर लघु और भारी (short and heavy) दोनों प्रकार से प्रयोग में लाया जाता है। उदाहरण के लिए: घर, नमक, कल।
2. इ (इ):
यह एक लघु स्वर है और इसका उच्चारण तिब्बत की "इ" ध्वनि के समान होता है। इसे संज्ञा या क्रिया के रूप में प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए: बिल्लि, किताब, मिलाना।
3. उ (उ):
यह स्वर "उ" ध्वनि के रूप में उच्चारित होता है। इसे उच्चारण में गहराई होती है। यह भी एक लघु स्वर होता है। उदाहरण के लिए: गुरु, बुराई, फूल।
4. ऋ (ऋ):
यह स्वर थोड़ी विशेषता रखता है क्योंकि यह संस्कृत के प्रभाव से आया है और इसका उच्चारण कुछ कठिन होता है। इसे संस्कृत और पुराने हिंदी शब्दों में पाया जाता है। उदाहरण के लिए: ऋषि, कृष्ण, मित्र।
इन चारों स्वर (अ, इ, उ, ऋ) को मूल स्वर के रूप में पहचाना जाता है क्योंकि इन्हें किसी अन्य स्वर के साथ मिलाकर उच्चारित नहीं किया जाता। ये अपने आप में पूर्ण ध्वनियां होती हैं।
प्रश्न का उत्तर:
आपके द्वारा दिया गया प्रश्न है कि मूल स्वर कौन से हैं?
आपके द्वारा दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर है:
(ब) अ इ उ ऋ
इसलिए, उत्तर है: (ब) अ इ उ ऋ
अन्य स्वर (व्युत्कृष्ट स्वर):
हिंदी में कई अन्य स्वर भी होते हैं, जो उपर्युक्त मूल स्वरों के साथ मिलकर विभिन्न प्रकार के ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं, जैसे:
- ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः आदि। ये स्वर संयुग्म स्वर होते हैं, जिनका निर्माण मूल स्वरों से ही किया जाता है।
सारांश में, मूल स्वर का मतलब वह स्वर है जो स्वतंत्र रूप से अपनी ध्वनि का उच्चारण कर सकता है और इनका प्रयोग शब्दों के निर्माण में प्राथमिक होता है।
