प्रश्न : 'घड़ीसाज' शब्द है –
(अ) देशज शब्द
(ब) संकर शब्द
(स) विकारी शब्द
(द) रूढ़ शब्द
सही उत्तर: (अ) देशज शब्द
विस्तृत व्याख्या:
‘घड़ीसाज’ शब्द का तात्पर्य है — घड़ी बनाने या उसकी मरम्मत करने वाला व्यक्ति।
इस शब्द की रचना हिन्दी की अपनी भाषा प्रणाली के अनुसार हुई है, न कि संस्कृत, उर्दू या अंग्रेज़ी जैसे भाषाओं से ग्रहण करके।
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यह शब्द हिन्दी की मौलिक या देशी बोलियों से जन्मा है, इसलिए इसे देशज शब्द माना जाता है।
देशज शब्द क्या होते हैं?
देशज शब्द वे शब्द होते हैं जो -
- केवल हिन्दी अथवा भारतीय भाषाओं की अपनी लोक बोलियों से बने होते हैं,
- संस्कृत, फारसी, अरबी या अंग्रेज़ी से नहीं लिए गए होते,
- पूर्णतः देशी रूप से उत्पन्न हुए होते हैं।
उदाहरण: टोपी, टोकरी, चप्पल, मिट्टी, कंबल, पगड़ी, घड़ीसाज आदि।
अब विकल्पों का विश्लेषण करें:
(अ) देशज शब्द
- 'घड़ीसाज' हिन्दी की देशी भाषा से बना है, किसी विदेशी स्रोत से नहीं लिया गया है।
- यह न तो संस्कृत का तत्सम है, न ही तद्भव या संकर।
(ब) संकर शब्द
- संकर शब्द वे होते हैं जो दो भाषाओं के मिश्रण से बनते हैं, जैसे: रेलगाड़ी (अंग्रेज़ी “रेल” + हिन्दी “गाड़ी”) ‘घड़ीसाज’ पूरी तरह हिन्दी संरचना वाला है, अतः यह संकर नहीं।
(स) विकारी शब्द
- विकारी शब्द वे होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक आदि के अनुसार रूप बदलने की क्षमता होती है, जैसे: लड़का-लड़के, अच्छा-अच्छी।
- 'घड़ीसाज' एक अव्यय संज्ञा रूप में प्रयुक्त होता है, और इसमें ऐसा कोई परिवर्तन नहीं होता।
(द) रूढ़ शब्द
- रूढ़ शब्द वे होते हैं जो दो या अधिक शब्दों से मिलकर बने हों, लेकिन उनका मूल अर्थ स्पष्ट न हो, जैसे: 'नागफनी', 'चांदनी'
- 'घड़ीसाज' में 'घड़ी' और 'साज' (बनाने वाला) स्पष्ट हैं, यह रूढ़ नहीं, बल्कि सहज व्युत्पन्न शब्द है।
निष्कर्ष:
‘घड़ीसाज’ शब्द पूर्णतः हिन्दी की देशज परंपरा से उत्पन्न हुआ है।
यह किसी विदेशी या संस्कृत स्रोत से नहीं लिया गया है, इसलिए इसे देशज शब्द कहा जाता है।
अतः सही उत्तर है – (अ) देशज शब्द
