प्रश्न : मुंशी प्रेमचंद की वह रचना जो अधूरी रह गई –
(अ) मंगलसूत्र
(ब) कर्बला
(स) रंगभूमि
(द) कर्मभूमि
सही उत्तर: (अ) मंगलसूत्र
विस्तृत व्याख्या:
मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के उपन्यास सम्राट कहे जाते हैं। उन्होंने अनेक प्रसिद्ध कहानियाँ और उपन्यास लिखे जिनमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और नैतिक पहलुओं का गहन चित्रण मिलता है।
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‘मंगलसूत्र’ मुंशी प्रेमचंद की अंतिम और अधूरी रचना है।
यह एक उपन्यास है जिसे वे अपने अंतिम समय में लिख रहे थे, लेकिन 1936 में उनकी मृत्यु हो जाने के कारण यह उपन्यास पूरा नहीं हो सका।
‘मंगलसूत्र’ का संक्षिप्त परिचय:
- यह उपन्यास समाज में स्त्री-पुरुष संबंधों, विवाह संस्था, और नैतिक मूल्यों पर आधारित है।
- प्रेमचंद इसमें भारतीय स्त्री की स्थिति और उसके मानसिक द्वंद्व को अत्यंत संवेदनशील ढंग से चित्रित कर रहे थे।
- उपन्यास की कथा और पात्रों में गंभीर सामाजिक संदेश देने की योजना थी, जो अधूरी रह गई।
इस उपन्यास का अधूरा रूप ही बाद में प्रकाशित हुआ, जो आज भी साहित्य प्रेमियों के लिए एक जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।
अब विकल्पों का विश्लेषण करें:
(अ) मंगलसूत्र
- यह प्रेमचंद का अधूरा उपन्यास है।
- उनकी मृत्यु (8 अक्टूबर 1936) के कारण यह पूरा नहीं हो सका।
(ब) कर्बला
- यह प्रेमचंद द्वारा लिखित एक नाटक है, जो पूरा है और समाज में धार्मिक एकता के संदेश पर आधारित है।
(स) रंगभूमि
- यह प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसमें नेत्रहीन पात्र 'सूरदास' के माध्यम से समाज की असमानताओं को दिखाया गया है।
- यह उपन्यास पूरा है।
(द) कर्मभूमि
- यह भी प्रेमचंद का पूरा और प्रकाशित उपन्यास है, जिसमें शिक्षा, राजनीति और धर्म के मुद्दों को उठाया गया है।
निष्कर्ष:
मुंशी प्रेमचंद की ‘मंगलसूत्र’ उनकी अंतिम रचना है जो अधूरी रह गई।
इस उपन्यास में भारतीय समाज की गहराई को उकेरने की कोशिश थी, लेकिन दुर्भाग्यवश यह पूरा नहीं हो सका।
अतः सही उत्तर है – (अ) मंगलसूत्र
