पर्यावरण और वंशानुक्रम का विकास पर प्रभाव
मनोवैज्ञानिकों ने विकास में पर्यावरण के महत्व के सम्बन्ध में अनेक अध्ययन एवं परीक्षण किए हैं। इन अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि बालक के विकास के प्रत्येक पहलू पर भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण का प्रभाव पड़ता है।
![]() |
| 1/1 |
शारीरिक वृद्धि एवं विकास पर पर्यावरण का प्रभाव
1. शारीरिक बनावट पर प्रभाव
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अलग-अलग प्रजातियों की शारीरिक बनावट में पर्यावरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका में कई पीढ़ियों से बसे जापानी लोगों की लंबाई वहाँ के भौगोलिक वातावरण के कारण बढ़ गई है।
2. बुद्धि पर प्रभाव
कैडोल नामक मनोवैज्ञानिक ने बताया कि बुद्धि के विकास में वातावरण की भूमिका अधिक होती है। उसने यह पाया कि अधिकांश बुद्धिमान व्यक्ति समृद्ध वर्ग से थे और उन्हें उत्तम शैक्षणिक सुविधाएँ प्राप्त थीं। स्टीफेन्स ने भी अपने प्रयोगों से यह सिद्ध किया कि यदि बच्चे को खराब वातावरण से हटाकर अच्छे वातावरण में रखा जाए, तो उसकी बुद्धि में सुधार होता है।
3. मानसिक विकास पर प्रभाव
गोर्डन के अनुसार, यदि बालक को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से कमजोर वातावरण में रखा जाए, तो उसके मानसिक विकास की गति धीमी हो जाती है। उसने गंदी बस्तियों में रहने वाले बच्चों का अध्ययन कर यह सिद्ध किया।
4. व्यक्तित्व पर प्रभाव
कूले ने बताया कि अच्छा वातावरण एक बालक के व्यक्तित्व को विकसित करने में मदद करता है। उसने यह अध्ययन प्रसिद्ध यूरोपीय लेखकों पर किया और पाया कि अच्छे वातावरण ने निर्धन परिवारों में जन्मे लेखकों को महान बनाया।
वंशानुक्रम का व्यक्ति की वृद्धि पर प्रभाव
- वंशानुक्रम का प्रभाव व्यक्ति के चरित्र और नैतिक विकास पर पड़ता है।
- यह बच्चे की ऊँचाई और शारीरिक रचना को प्रभावित करता है।
- कैटल के अनुसार, कार्यकुशलता वंशानुक्रम से प्रभावित होती है।
- मानव का सामाजिक विकास भी वंशानुक्रम पर निर्भर होता है।
- लगभग 80% मानसिक योग्यता वंशानुक्रम से जुड़ी होती है।
वातावरण का विकास पर प्रभाव
- वातावरण शारीरिक विकास को प्रभावित करता है।
- वातावरण मानसिक विकास को भी प्रभावित करता है।
- व्यक्तित्व के विकास जैसे दृष्टिकोण, नैतिकता और आदतों पर इसका असर होता है।
- कुछ शारीरिक क्रियाएँ प्रतिकूल वातावरण के कारण अविकसित रह जाती हैं।
- कौशलों के विकास में भी वातावरण का योगदान होता है।
