प्रश्न : 'पवन' में संधि है –
(अ) गुण संधि
(ब) यण संधि
(स) अयादि संधि
(द) कोई नहीं
सही उत्तर: (स) अयादि संधि
विस्तृत व्याख्या :
'पवन' शब्द में हमें ध्यान देना होगा कि यह "पवि + अन" का रूपांतरण नहीं है, बल्कि हिन्दी व्याकरण में इसे अक्सर नी + अ → नाय जैसे उदाहरणों के साथ जोड़कर अयादि संधि में शामिल किया जाता है।
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उदाहरण स्वरूप:
- नायक = नय + अक → 'य' का 'आय' में रूपांतरण – अयादि संधि
- पवन = पव + अन → यहाँ ‘व’ का ‘अव’ में रूपांतरण
अयादि संधि में जब मूल शब्द का अंतिम स्वर इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ होता है और इसके बाद स्वरांत शब्द जुड़ता है, तो पहला स्वर आय, अव, आरि में बदल जाता है।
अब ध्यान दें:
- 'पव' में ‘व’ से पहले ‘अ’ स्वर है
- जब 'पव' में ‘अन’ जुड़ता है → ‘पव + अन’ = पवन
अब यदि हम इसे हिन्दी की अयादि संधि मानें तो ‘व’ के स्थान पर ‘अव’ रूप का स्वीकार होना इसे अयादि सन्धि के अंतर्गत लाता है (कुछ मान्यताओं में)।
उपसंहार:
यदि हम शुद्ध रूप से संस्कृत व्याकरण के आधार पर देखें तो इसमें संधि नहीं मानी जाती।
लेकिन यदि हम हिन्दी भाषा की संधियों और उनके व्यावहारिक प्रयोग को ध्यान में रखें (जैसा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होता है), तो इसे अयादि सन्धि का उदाहरण माना जाता है।
इसलिए यदि प्रश्न हिन्दी विषय का है (जैसा आपने बताया), तो: सही उत्तर होगा – (स) अयादि संधि
