प्रश्न : 'दूध का दूध पानी का पानी' से क्या तात्पर्य है? (अ) गुणगान करना (ब) पीना (स) दूर की बातें (द) सच्चा न्याय

प्रश्न : 'दूध का दूध पानी का पानी' से क्या तात्पर्य है?
(अ) गुणगान करना
(ब) पीना
(स) दूर की बातें
(द) सच्चा न्याय

सही उत्तर: (द) सच्चा न्याय


विस्तृत व्याख्या:

‘दूध का दूध, पानी का पानी’ हिन्दी का अत्यंत प्रसिद्ध और पुरातन मुहावरा है। इसका प्रयोग तब किया जाता है जब किसी मामले में सच्चाई को उजागर किया जाए और झूठ-सच में स्पष्ट अंतर स्थापित कर दिया जाए। यह वाक्य न्याय, निष्पक्षता, और पारदर्शिता का प्रतीक बन चुका है।

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मुहावरे की उत्पत्ति और अर्थ:

प्राचीन समय में दूध की शुद्धता की पहचान के लिए कहा जाता था कि अगर उसमें पानी मिलाया गया हो, तो वह साफ अलग दिखाई देगा। अतः 'दूध का दूध और पानी का पानी' का मतलब है –
जो दूध है, वही दिखे और जो पानी है, वह भी स्पष्ट हो — यानी चीज़ें जैसी हैं, वैसी ही सामने आ जाएं।

इसलिए इस मुहावरे का भावार्थ है:

सत्य और असत्य में स्पष्ट भेद करना; निर्णय करते समय पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता रखना।

प्रयोग के उदाहरण:

  1. "जज ने सारे पक्षों की बात सुनकर दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया।" अर्थ: निष्पक्ष और न्यायसंगत निर्णय दिया।
  2. "अब तुम्हें साफ-साफ बताना होगा, दूध का दूध और पानी का पानी करना होगा।" अर्थ: सच और झूठ का भेद स्पष्ट करना।

विकल्पों का विश्लेषण:

(अ) गुणगान करना: यह 'प्रशंसा' करने से संबंधित है, जिसका इस मुहावरे से कोई संबंध नहीं है।

(ब) पीना: ‘दूध’ और ‘पानी’ पीने की वस्तुएँ ज़रूर हैं, लेकिन यह मुहावरा पीने से संबंधित बिल्कुल नहीं है, बल्कि प्रतीकात्मक प्रयोग है।

(स) दूर की बातें: यह ‘कल्पनात्मक’ या ‘असंगत’ बातों को दर्शाता है। मुहावरा इससे बिल्कुल अलग है।

(द) सच्चा न्याय – सही उत्तर
इसमें निष्पक्षता, स्पष्टता और सत्य के उजागर होने की बात की गई है, जो इस मुहावरे का सटीक और           वास्तविक अर्थ है।

निष्कर्ष:

‘दूध का दूध, पानी का पानी’ मुहावरा उन परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है जब सच्चाई को उजागर किया जाता है और न्याय के साथ सही-गलत में स्पष्ट भेद कर दिया जाता है। यह वाक्य न्यायप्रियता और पारदर्शिता का प्रतीक बन चुका है। अतः सही उत्तर है – (द) सच्चा न्याय

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