प्रश्न : भाषा स्वयं में – (अ) एक विषय मात्र है। (ब) सम्प्रेषण का एकमात्र साधन है। (स) एक नियमबद्ध व्यवस्था है। (द) एक जटिल चुनौती है।

प्रश्न : भाषा स्वयं में –

(अ) एक विषय मात्र है।
(ब) सम्प्रेषण का एकमात्र साधन है।
(स) एक नियमबद्ध व्यवस्था है।
(द) एक जटिल चुनौती है।

सही उत्तर: (स) एक नियमबद्ध व्यवस्था है।


विस्तृत व्याख्या :

भाषा मानव समाज की सबसे मौलिक और शक्तिशाली अभिव्यक्ति प्रणाली है। यह केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक नियमबद्ध, संरचित और व्यवस्थित प्रणाली है जिसके माध्यम से मनुष्य अपने विचार, भावनाएँ, जानकारी, अनुभव और संस्कृति का आदान-प्रदान करता है।

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प्रश्न में पूछा गया है कि भाषा स्वयं में क्या है — और इसका सटीक उत्तर है:
"एक नियमबद्ध व्यवस्था"

अब विस्तार से समझते हैं कि भाषा को "नियमबद्ध व्यवस्था" क्यों कहा जाता है:

1. भाषा में व्याकरणिक नियम होते हैं:

भाषा किसी भी रूप में हो — मौखिक या लिखित — वह व्याकरण के नियमों पर आधारित होती है।
यह व्याकरणिक नियम बताते हैं कि शब्दों को वाक्यों में किस तरह रखा जाए, कौन-सा काल, वचन, कारक, संज्ञा, क्रिया आदि कहाँ आएंगे।

उदाहरण के लिए:

  • “राम स्कूल गया।”
  • लेकिन “राम गया स्कूल” कहना भी संभव है, किंतु इसकी स्वाभाविकता और शैली भाषा के नियमों के अनुसार कमज़ोर मानी जाएगी।

2. ध्वनियों और उच्चारण का अनुशासन:

हर भाषा में ध्वनियों का एक निश्चित समूह होता है — जिन्हें ध्वनिविज्ञान (Phonetics) के नियमों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
इन नियमों के आधार पर उच्चारण, विराम, लय आदि बनते हैं, जो भाषा को सुनने और समझने योग्य बनाते हैं।

3. शब्द निर्माण के नियम:

भाषा में उपसर्ग, प्रत्यय, समास, और संधि जैसे नियमों के अनुसार नए शब्द बनाए जाते हैं।
उदाहरण:

  • प्र + गति = प्रगति
  • सु + ज्ञान = सज्ञान

4. अर्थ और प्रयोग की नियमितता:

भाषा का प्रत्येक शब्द एक अर्थ से जुड़ा होता है, और उसका प्रयोग भी एक विशेष संदर्भ में किया जाता है।
यदि भाषा नियमबद्ध न होती, तो हर कोई अपनी मनमानी भाषा बोलता, और कोई किसी को समझ नहीं पाता।


अब प्रश्न के अन्य विकल्पों का विश्लेषण करें:

(अ) एक विषय मात्र है:

  • भाषा केवल एक "विषय" नहीं है, जैसा गणित या भूगोल।
  • यह एक जीवनशैली, अभ्यास और व्यवहारिक साधन है।
  • भाषा के रूप में मनुष्य सीखता है, सोचता है, और समाज में जुड़ता है।
  • इसलिए इसे "विषय मात्र" कह कर सीमित करना गलत है।

(ब) सम्प्रेषण का एकमात्र साधन है:

  • यह भी आंशिक सत्य है, लेकिन पूर्ण सत्य नहीं।
  • सम्प्रेषण के और भी साधन हैं — जैसे संकेत, हाव-भाव (non-verbal communication), चित्र, प्रतीक आदि।
  • भाषा उनमें से एक प्रमुख साधन है, लेकिन “एकमात्र” नहीं।

 (द) एक जटिल चुनौती है:

  • यह भाषा सीखने वालों के लिए कभी-कभी सच हो सकता है,
  • लेकिन यह भाषा की प्रकृति को नहीं दर्शाता।
  • भाषा का निर्माण, विकास और प्रयोग एक संगठित, नियमबद्ध और सुस्पष्ट प्रणाली के अनुसार होता है, न कि केवल जटिलता के आधार पर।

निष्कर्ष:

भाषा केवल एक संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण संरचना है जो ध्वनि, शब्द, व्याकरण, अर्थ और प्रयोग के निश्चित नियमों के अनुसार संचालित होती है। इसलिए भाषा को एक नियमबद्ध व्यवस्था (systematic structure) कहना उचित और शुद्ध व्याख्या है।

इस प्रश्न का सही उत्तर है – (स) एक नियमबद्ध व्यवस्था है।

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