प्रश्न : भाषा का प्रयोग – (अ) केवल परीक्षा में होता है। (ब) केवल पाठ्य-पुस्तकों में होता है। (स) केवल मुद्रित सामग्री में होता है। (द) जीवन के विभिन्न सन्दर्भों में होता है।

प्रश्न : भाषा का प्रयोग –

(अ) केवल परीक्षा में होता है।
(ब) केवल पाठ्य-पुस्तकों में होता है।
(स) केवल मुद्रित सामग्री में होता है।
(द) जीवन के विभिन्न सन्दर्भों में होता है।

सही उत्तर: (द) जीवन के विभिन्न सन्दर्भों में होता है।


विस्तृत व्याख्या :

भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं है, बल्कि मनुष्य की सामाजिक, सांस्कृतिक, भावनात्मक और बौद्धिक अभिव्यक्ति का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। भाषा का प्रयोग एक सीमित या औपचारिक दायरे में नहीं होता, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र और संदर्भ में प्रयुक्त होती है। इसलिए यह कथन कि "भाषा का प्रयोग जीवन के विभिन्न संदर्भों में होता है" — पूर्णतः सही और व्यापक दृष्टिकोण वाला है।

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1. भाषा का प्रयोग — केवल परीक्षा तक सीमित नहीं:

  • यदि हम मानें कि भाषा का प्रयोग केवल परीक्षा के लिए होता है (जैसा विकल्प (अ) में कहा गया है), तो यह भाषा की भूमिका को सीमित कर देता है।
  • परीक्षा में भाषा का प्रयोग निश्चित रूप से होता है — जैसे उत्तर लिखने, प्रश्न समझने, व्याख्या करने में — लेकिन यह उसका एक अत्यंत सीमित और औपचारिक रूप है।
  • वास्तविक जीवन में परीक्षा के बाहर भाषा का प्रयोग और अधिक व्यापक और बहुआयामी होता है।

2. भाषा पाठ्य-पुस्तकों तक सीमित नहीं:

  • (ब) केवल पाठ्य-पुस्तकों में होता है — यह कथन भी असत्य है।
  • पाठ्यपुस्तकें भाषा का एक माध्यम हैं, लेकिन भाषा इनसे बहुत अधिक विस्तृत है।
  • भाषा का प्रयोग विद्यार्थी कक्षा में, घर पर, दोस्तों के साथ, इंटरनेट पर, मोबाइल में — हर जगह करता है।
  • पाठ्यपुस्तकों में जो भाषा होती है वह प्रायः औपचारिक और विषयकेंद्रित होती है, जबकि जीवन में भाषा के अनगिनत रूप और स्तर होते हैं — जैसे बातचीत, समाचार, कविता, विज्ञापन, सोशल मीडिया आदि।

3. मुद्रित सामग्री तक सीमित नहीं:

  • (स) केवल मुद्रित सामग्री में होता है — यह कथन भी एक सीमित और यांत्रिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • आज की डिजिटल दुनिया में भाषा का प्रयोग केवल मुद्रित (प्रिंटेड) सामग्री तक सीमित नहीं है।
  • रेडियो, टीवी, मोबाइल ऐप्स, YouTube, सोशल मीडिया जैसे अनेक माध्यमों में भाषा का प्रयोग हो रहा है — वो भी मौखिक, दृश्य, लिखित और संकेतात्मक रूपों में।

4. वास्तविकता – भाषा जीवन के विभिन्न संदर्भों में:

विकल्प (द) इस प्रश्न का सही उत्तर है, क्योंकि भाषा का प्रयोग जीवन के सभी पहलुओं में किया जाता है।
आइए कुछ प्रमुख संदर्भों को देखें:

  • व्यक्तिगत जीवन में: बोलचाल, भाव व्यक्त करना, रिश्तों में संवाद, समस्या को साझा करना।
  • शिक्षा में: समझना, पढ़ना, लिखना, उत्तर देना, प्रस्तुतियाँ देना।
  • पेशेवर जीवन में: रिपोर्ट लेखन, ईमेल, व्यावसायिक मीटिंग्स, सार्वजनिक भाषण, साक्षात्कार।
  • सामाजिक जीवन में: समारोह, भाषण, मीडिया, बहस, सामाजिक चेतना।
  • सांस्कृतिक संदर्भ में: साहित्य, कविता, लोकगीत, नाटक, कहावतें — सभी भाषा की रचनात्मक अभिव्यक्तियाँ हैं।
  • तकनीकी संदर्भ में: प्रोग्रामिंग भाषाएँ, मशीन भाषा, यूज़र इंटरफेस की भाषा, टेक्स्ट-टू-स्पीच, चैटबॉट आदि में भी भाषा का प्रयोग किया जा रहा है।

निष्कर्ष:

भाषा का प्रयोग केवल परीक्षा, पाठ्यपुस्तक या मुद्रित सामग्री तक सीमित नहीं है। यह जीवन के प्रत्येक आयाम में प्रयुक्त होती है — भावनाओं की अभिव्यक्ति से लेकर विचारों के आदान-प्रदान, निर्णय लेने, सोचने, समझने और संवाद स्थापित करने तक। इसलिए इस प्रश्न का सही उत्तर है – (द) जीवन के विभिन्न संदर्भों में होता है।

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