प्रश्न : बच्चों की भाषा के आकलन का सर्वाधिक प्रभावी तरीका है –
(अ) प्रश्न पूछना और पढ़ी गई सामग्री पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना
(ब) श्रुत लेख
(स) लिखित परीक्षा
(द) प्रश्नों के उत्तर देना
सही उत्तर : (अ) प्रश्न पूछना और पढ़ी गई सामग्री पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना
विस्तृत व्याख्या :
भाषा का आकलन (Language Assessment) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से यह जाना जाता है कि बच्चा भाषा के किन स्तरों (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) पर कितना सक्षम है। इसमें केवल यह नहीं देखा जाता कि उसने "क्या याद किया", बल्कि यह भी देखा जाता है कि वह अपनी भाषा का प्रयोग कैसे करता है, कैसे समझता है, कैसे प्रतिक्रिया देता है, और कितनी सृजनात्मकता से वह भाषा का उपयोग करता है।
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भाषा का स्वाभाविक विकास संवाद और प्रतिक्रिया पर आधारित होता है — न कि केवल लिखने या याद करके उत्तर देने पर।
अब प्रत्येक विकल्प को विस्तार से समझते हैं:
(अ) प्रश्न पूछना और पढ़ी गई सामग्री पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना – ✅ सही उत्तर
यह भाषा आकलन का सबसे प्रभावी, सक्रिय और व्यवहारिक तरीका है, क्योंकि:
- जब शिक्षक बच्चों से प्रश्न पूछते हैं और उन्हें पढ़ी गई सामग्री पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया देने का अवसर मिलता है, तो बच्चा सुनने, समझने, सोचने, बोलने और अपने विचारों को व्यक्त करने के कौशल का प्रयोग करता है।
- यह प्रक्रिया बच्चों की समझ, सोच, अभिव्यक्ति और आलोचनात्मक दृष्टि को सामने लाती है, जो केवल लिखित परीक्षा से संभव नहीं।
उदाहरण:
अगर बच्चा कोई कहानी पढ़ता है और फिर शिक्षक पूछता है –
"तुम्हें इस कहानी में सबसे अच्छा पात्र कौन लगा और क्यों?"
तो बच्चा जो उत्तर देगा, उसमें उसकी भाषा समझ, तर्क शक्ति और भावनात्मक जुड़ाव दिखेगा। यह भाषा के गहरे स्तर का आकलन है।
(ब) श्रुत लेख – आंशिक रूप से सही, लेकिन सीमित
- श्रुतलेख (dictation) से यह आंका जा सकता है कि बच्चा सुनकर सही शब्द लिख पा रहा है या नहीं।
- इससे वर्तनी, सुनने की क्षमता और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
- लेकिन यह केवल लिखित कौशल का एक भाग है — इसमें भाषा की समग्र समझ, रचनात्मकता या मौखिक अभिव्यक्ति की जानकारी नहीं मिलती।
- इसलिए यह अकेले प्रभावी तरीका नहीं है।
(स) लिखित परीक्षा – गलत उत्तर
- लिखित परीक्षा में बच्चे अक्सर रटे हुए उत्तर देते हैं।
- यह प्रक्रिया भाषा को स्मृति आधारित विषय बना देती है, जबकि भाषा एक प्रयोगात्मक और जीवंत कला है।
- लिखित परीक्षा केवल यह जाँचती है कि बच्चे को व्याकरण, परिभाषाएँ या उत्तर याद हैं या नहीं — जबकि हम जानना चाहते हैं कि बच्चा भाषा का प्रयोग कैसे करता है।
इसके अलावा:
- सभी बच्चे एक जैसे नहीं होते — कुछ बच्चे मौखिक रूप से बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन लिखित में कमजोर।
- केवल लिखित परीक्षा से आकलन करना उनके साथ अन्याय हो सकता है।
(द) प्रश्नों के उत्तर देना – सीमित प्रभाव वाला तरीका
- यह विकल्प भी परीक्षा जैसा ही है।
- जब बच्चे केवल प्रश्नों के उत्तर देते हैं, तो वे अक्सर रटकर उत्तर देने की प्रवृत्ति अपनाते हैं।
- यह प्रक्रिया भाषा की मौलिकता, अभिव्यक्ति और प्रयोग क्षमता को नहीं उभारती।
निष्कर्ष:
भाषा का उद्देश्य होता है – विचारों का आदान-प्रदान, भावनाओं की अभिव्यक्ति और संवाद स्थापित करना। इसलिए भाषा के आकलन का सबसे प्रभावी तरीका वही होगा जो बच्चे को प्रतिक्रिया देने, संवाद करने, तर्क प्रस्तुत करने और अपने शब्दों में बात रखने का अवसर दे।
इस दृष्टिकोण से सबसे उपयुक्त तरीका है: (अ) प्रश्न पूछना और पढ़ी गई सामग्री पर प्रतिक्रिया व्यक्त करना
