वाच्य का अर्थ व प्रकार | Vachya in Hindi Grammar - Definition and Types

वाच्य का अर्थ व प्रकार | Vachya in Hindi Grammar - Definition and Types

वाच्य का शाब्दिक अर्थ है- बोलने का विषय। क्रिया के जिस रूप से यह जाना जाए कि क्रिया द्वारा किए गए विधान का विषय कर्ता है, कर्म है या भाव है, उसे वाच्य कहते हैं।

वाच्य के प्रकार | Types of Vachya

1. कर्तृवाच्य (Kartarvachya / Active Voice):
क्रिया के जिस रूप से वाक्य के उद्देश्य (क्रिया के कर्ता) का बोध हो, वह कर्तृवाच्य कहलाता है। इसमें लिंग एवं वचन प्रायः कर्ता के अनुसार होते हैं।
उदाहरण: बच्चा खेलता है।

2. कर्मवाच्य (Karmvachya / Passive Voice):
क्रिया के जिस रूप से वाक्य का उद्देश्य कर्म प्रधान हो, उसे कर्मवाच्य कहते हैं।
उदाहरण:
भारत-पाक युद्ध में सहस्रों सैनिक मारे गए।
छात्रों द्वारा नाटक प्रस्तुत किया जा रहा है।
पुस्तक मेरे द्वारा पढ़ी गई।
बच्चों के द्वारा निबंध पढ़े गए।
इन वाक्यों में क्रियाओं में कर्म की प्रधानता दर्शायी गई है। उनकी रूप-रचना भी कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हुई है। क्रिया के ऐसे रूप कर्मवाच्य कहलाते हैं।

3. भाववाच्य (Bhavvachya / Impersonal Voice):
क्रिया के जिस रूप से वाक्य का उद्देश्य केवल भाव (क्रिया का अर्थ) ही जाना जाए, वहाँ भाववाच्य होता है। इसमें कर्ता या कर्म की प्रधानता नहीं होती है। इसमें क्रिया सदैव पुल्लिंग, अन्य पुरुष के एक वचन की होती है।

वाच्य हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है, जिससे वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव की प्रधानता का बोध होता है। प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड एग्जाम के लिए vachya in hindi grammar, kartarvachya karmvachya bhavvachya के उदाहरण और परिभाषा जरूर याद रखें।

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