योग क्या है?
योग एक प्राचीन भारतीय प्रणाली है, जो शारीरिक, मानसिक और आत्मिक विकास के लिए की जाती है। योग शब्द संस्कृत के "युज" धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है – "जोड़ना" या "एकीकरण"। योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा को एक साथ संतुलित किया जाता है। इसमें आसन (शारीरिक क्रियाएँ), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), ध्यान (मेडिटेशन) और जीवनशैली के नियम शामिल होते हैं। योग नियमित करने से स्वास्थ्य, एकाग्रता और मानसिक शांति मिलती है।
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योग का इतिहास
योग का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना कि भारतवर्ष का इतिहास। यह स्पष्ट नहीं है कि योग की शुरुआत कब हुई, लेकिन यह निश्चित है कि इसकी उत्पत्ति भारत में हुई। धार्मिक ग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों से इसका प्रमाण मिलता है।
सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में मोहनजोदड़ो से प्राप्त मूर्तियों में योगिक मुद्राओं के चित्र मिले हैं, जो लगभग 3000 ईसा पूर्व के हैं। वेदों में, विशेषकर ऋग्वेद में, योग का उल्लेख मिलता है। भगवद गीता (लगभग 400 ईसा पूर्व) में श्रीकृष्ण द्वारा योग के महत्व को बताया गया है: “योग: कर्मसु कौशलम्” यानी कुशलता से कर्म करना ही योग है।
मध्यकाल में पतंजलि ने योगसूत्र की रचना कर इसे एक व्यवस्थित दर्शन का रूप दिया। अन्य संतों जैसे कबीर, तुलसीदास और सिक्खों के ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी योग का उल्लेख मिलता है। यह दर्शाता है कि योग भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा का अभिन्न अंग रहा है।
योग का अर्थ
“योग” शब्द संस्कृत के “युज” धातु से बना है, जिसका अर्थ है “जुड़ना” या “मेल करना”। इसका आशय है आत्मा का परमात्मा से मिलन या शरीर, मन और आत्मा का संतुलन।
योग की परिभाषा
योग एक ऐसी क्रिया या प्रणाली है जिससे व्यक्ति आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है और आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है।
कुछ प्रसिद्ध परिभाषाएँ:
- पतंजलि: “चित्तवृत्ति निरोध:” – चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है।
- भगवद गीता: “योग: कर्मसु कौशलम्” – कुशलता से कर्म करने का नाम योग है।
- डॉ. सम्पूर्णानंद: “योग आध्यात्मिक कामधेनु है, जिससे जो माँगा जाए, वह प्राप्त होता है।”
इन सभी परिभाषाओं का सार यह है कि योग एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें परमात्मा से जोड़ती है।
योग के मुख्य 8 अंग (अष्टांग योग)
योग को पूर्णता से समझने के लिए इसे 8 अंगों में बाँटा गया है, जिसे “अष्टांग योग” कहा जाता है।
- यम
- नियम
- आसन
- प्राणायाम
- प्रत्याहार
- धारणा
- ध्यान
- समाधि
1. यम (नैतिक अनुशासन)
यम पाँच प्रकार के होते हैं:
- अहिंसा (Non-violence)
- सत्य (Truth)
- अस्तेय (चोरी न करना)
- ब्रह्मचर्य (इंद्रिय संयम)
- अपरिग्रह (लोभ न करना)
2. नियम (व्यक्तिगत अनुशासन)
नियम के भी पाँच अंग होते हैं:
- शौच (शुद्धता)
- संतोष (संतुष्टि)
- तप (अनुशासन)
- स्वाध्याय (आत्म-अध्ययन)
- ईश्वर प्राणिधान (ईश्वर में समर्पण)
3. आसन
शारीरिक मुद्राएँ जिन्हें ध्यानपूर्वक किया जाता है। उदाहरण – पद्मासन, वज्रासन, ताड़ासन, भुजंगासन आदि।
4. प्राणायाम
सांसों पर नियंत्रण की प्रक्रिया। इसके तीन मुख्य भाग हैं:
- पूरक: सांस अंदर लेना
- कुम्भक: सांस रोकना
- रेचक: सांस बाहर छोड़ना
5. प्रत्याहार
इंद्रियों को बाह्य विषयों से हटाकर मन की ओर केंद्रित करना। पतंजलि के अनुसार – इंद्रियों को नियंत्रित करना ही प्रत्याहार है।
6. धारणा
मन को किसी एक बिंदु या वस्तु पर स्थिर करना। यह ध्यान की पूर्व अवस्था है।
7. ध्यान
लगातार एकाग्रता की स्थिति, जिसमें मन पूरी तरह से लक्ष्य पर केंद्रित होता है।
8. समाधि
ध्यान की चरम अवस्था, जिसमें साधक आत्मा और परमात्मा के एकत्व का अनुभव करता है।
योग के लाभ
- शारीरिक और मानसिक तनाव कम करता है।
- प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाता है।
- मन को शांत और स्थिर करता है।
- रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा जैसे रोगों में लाभकारी।
- आत्मज्ञान और आंतरिक शांति प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: योग का जन्म कब और कहाँ हुआ?
उत्तर: योग का जन्म भारत में हजारों वर्ष पूर्व हुआ। इसके प्रमाण सिंधु घाटी सभ्यता से प्राप्त हुए हैं।
प्रश्न: योग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: आत्मा और परमात्मा का मिलन तथा मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धि।
प्रश्न: योग के कितने अंग हैं?
उत्तर: योग के आठ अंग होते हैं जिन्हें अष्टांग योग कहा जाता है।
प्रश्न: योग किस धर्म से जुड़ा है?
उत्तर: योग हिंदू धर्म की देन है, लेकिन यह सभी धर्मों और लोगों के लिए उपयोगी है।
प्रश्न: योग का क्या अर्थ है?
उत्तर: योग का अर्थ है – जुड़ना या मेल।
