प्रश्न : वात्सल्य रस के सम्राट कहे जाते हैं –
(अ) तुलसीदास
(ब) सूरदास
(स) रहीमदास
(द) कबीरदास
सही उत्तर: (ब) सूरदास
विस्तृत व्याख्या:
रस का अर्थ होता है — भावों की अनुभूति या सौंदर्य की अभिव्यक्ति।
वात्सल्य रस वह रस होता है जिसमें माता-पिता जैसा प्रेम, ममता, स्नेह और लाड़-प्यार व्यक्त होता है। विशेष रूप से जब ईश्वर को बाल रूप में देखा जाता है, तब यह रस प्रमुखता से सामने आता है।
![]() |
| 1/1 |
सूरदास और वात्सल्य रस:
- सूरदास जी भक्ति काल के महान कवि थे।
- वे कृष्ण भक्त थे और उन्होंने श्रीकृष्ण के बाल रूप, उसकी चंचलता, मातृभाव और ग्वालिनों से लाड़-प्यार को अपनी कविताओं में जीवंत कर दिया।
- उनकी रचनाओं में यशोदा और बालकृष्ण के बीच के भावनात्मक दृश्य अत्यंत मार्मिक और वात्सल्य से भरपूर होते हैं।
- उनकी काव्य रचना "सूरसागर" में वात्सल्य रस की झलक प्रमुख रूप से मिलती है।
उदाहरण:
"मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो..."
इस पद में बालकृष्ण की मासूमियत, और यशोदा की ममता को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
अन्य विकल्प:
- तुलसीदास – रामभक्ति और श्रृंगार/शांत रस के कवि (रामचरितमानस)।
- रहीमदास – नीति, प्रेम और भक्ति के कवि।
- कबीरदास – निर्गुण भक्ति मार्ग के प्रवर्तक, ज्ञान और वैराग्य रस से युक्त दोहे।
निष्कर्ष:
सूरदास ने अपनी रचनाओं में वात्सल्य रस का अद्भुत चित्रण किया है, इसलिए उन्हें "वात्सल्य रस के सम्राट" कहा जाता है। सही उत्तर है – (ब) सूरदास।
