प्रश्न : भाषा अर्जन में महत्वपूर्ण है – (अ) भाषा का व्याकरण (ब) पाठ्यपुस्तक (स) भाषा का शिक्षक (द) भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग

प्रश्न : भाषा अर्जन में महत्वपूर्ण है –

(अ) भाषा का व्याकरण
(ब) पाठ्यपुस्तक
(स) भाषा का शिक्षक
(द) भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग


सही उत्तर : (द) भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग


विस्तृत व्याख्या :

भाषा अर्जन (Language Acquisition) एक प्राकृतिक और मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति — विशेष रूप से बच्चे — सुनकर, बोलकर, पढ़कर और लिखकर भाषा सीखते हैं। यह प्रक्रिया जन्म से ही प्रारंभ हो जाती है और बहुत हद तक हमारे परिवेश, वातावरण और भाषा के प्रयोग पर निर्भर करती है।

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भाषा अर्जन और भाषा शिक्षण में अंतर:

  • भाषा अर्जन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो विशेष रूप से बचपन में होती है, जब बच्चा सुनने, देखने और संवाद करने के माध्यम से भाषा को पकड़ता है।
  • भाषा शिक्षण एक औपचारिक प्रक्रिया है, जो स्कूल या कक्षा में होती है, जहाँ भाषा के नियम, व्याकरण, पाठ्यपुस्तकें और शिक्षक की सहायता से भाषा सिखाई जाती है।

इस प्रश्न में पूछा गया है कि "भाषा अर्जन में क्या महत्वपूर्ण है", न कि भाषा शिक्षण में।

अब विकल्पों का विश्लेषण करते हैं:

(अ) भाषा का व्याकरण

  • व्याकरण भाषा को सही ढंग से प्रयोग करने में मदद करता है।
  • लेकिन बच्चा जब भाषा अर्जित करता है, तो वह पहले व्याकरण नहीं सीखता — वह सुनता है, बोलता है, और प्रयोग करता है, और फिर धीरे-धीरे व्याकरणिक रूपों को समझने लगता है।
  • उदाहरण के लिए, बच्चा “मैं पानी पिया” कह सकता है — यह व्याकरण के अनुसार गलत है, लेकिन यह भाषा अर्जन की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।
  • इसलिए व्याकरण भाषा शिक्षण में महत्वपूर्ण है, भाषा अर्जन में नहीं।

(ब) पाठ्यपुस्तक

  • पाठ्यपुस्तक एक औपचारिक शिक्षण उपकरण है।
  • भाषा अर्जन में इसका योगदान सीमित होता है, विशेषकर बचपन में, जब बच्चा बोलना सीखता है तो वह किताबों से नहीं, अपने वातावरण और लोगों से सीखता है

(स) भाषा का शिक्षक

  • शिक्षक भाषा को सिखाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकता है, लेकिन स्वाभाविक भाषा अर्जन के लिए शिक्षक की उपस्थिति जरूरी नहीं होती।
  • एक बच्चा अपने परिवेश, माता-पिता और समाज से भाषा स्वत: सीख सकता है, भले ही वह स्कूल न गया हो।

(द) भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग

  • यही भाषा अर्जन की जड़ है
  • जब बच्चा सुनता है, बोलता है, इशारे करता है, बातचीत करता है, खेलता है, तो वह भाषा के विभिन्न रूपों से गुजरता है — जैसे मौखिक भाषा, संकेत, स्वर, भाव, लय आदि।
  • इन प्रयोगों से ही बच्चा भाषा को आत्मसात करता है।
  • भाषा का प्रयोग जितना अधिक होगा, अर्जन उतना प्रभावी होगा।

निष्कर्ष:

भाषा अर्जन एक प्रयोग-आधारित प्रक्रिया है, न कि नियम आधारित। इसलिए 'भाषा का व्याकरण' भाषा सीखने में सहायक हो सकता है, लेकिन अर्जन की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण है – भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग।

इसलिए सही उत्तर होना चाहिए — (द) भाषा के विभिन्न रूपों का प्रयोग।


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